पुस्तक परिचय: झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा का एक जीवंत अंश है जहाँ माटी में इतिहास साँस लेता है, और जंगलों में संस्कृति गूंजती है। *ओमप्रकाश प्रजापति* द्वारा लिखित यह पुस्तक झारखंड की विविधता, संघर्ष और सौंदर्य को एक आत्मीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। यह पाँच भागों में विभाजित पुस्तक पाठकों को एक समग्र यात्रा पर ले जाती है: भाग १: झारखंड का परिचय – धरती की आत्मकथा और ऐतिहासिक गूंज झारखंड के उद्गम और विकास की कहानी। भाग २: संस्कृति और परंपरा – लोक कला, नृत्य, खान-पान, पहनावा और त्योहारों के माध्यम से झारखंड की सांस्कृतिक आत्मा को उजागर करता है। भाग ३: धरती और संसाधन – खनिजों का खजाना, वन्यजीव और प्राकृतिक संपदा झारखंड की भौगोलिक समृद्धि। भाग ४: समाज और चुनौतियाँ – शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन और बाल श्रम जैसे ज्वलंत मुद्दों पर संवेदनशील विश्लेषण। भाग ५: समापन – लेखक की दृष्टि से वह झारखंड जिसकी कल्पना वह करता है एक न्यायपूर्ण, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से जागरूक राज्य। यह पुस्तक किसके लिए है? – छात्रों, शोधकर्ताओं, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए – सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और नीति-निर्माताओं के लिए – और हर उस पाठक के लिए जो झारखंड को दिल से समझना चाहता है विशेषताएँ: – सरल, भावनात्मक और तथ्यपूर्ण भाषा – सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं का संतुलित चित्रण – ग्रामीण जीवन की सजीव झलकियाँ झारखंड की आत्मा को शब्दों में पिरोती यह पुस्तक एक दस्तावेज़ है जो न केवल पढ़ी जाती है, बल्कि महसूस की जाती है।
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मैं हूं झारखंड
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