चौदह साल का मौन” एक गहरा और संवेदनशील कविता-संग्रह है, जो एक कवि के अंतर्मन में वर्षों से सहेजी गई खामोश भावनाओं, यादों और अनुभवों को शब्दों का रूप देता है। सुधीर कुमार की यह प्रथम काव्य कृति उनके गाँव की मिट्टी की सुगंध, प्रेम और विरह की अनुभूति, सामाजिक चेतना और जीवन के कठोर सत्यों का सजीव संगम है। यांत्रिक और कॉर्पोरेट जीवन की व्यस्तता के बीच भी कवि का मन अपनी जड़ों, अपनी मातृभूमि और अपनी भावनाओं से गहराई से जुड़ा रहता है। इस पुस्तक की कविताएँ प्रेम की कोमलता, देशभक्ति का उत्साह, नारी-संवेदना, सामाजिक पीड़ा और व्यक्तिगत संघर्ष को सरल, सहज और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करती हैं। “चौदह साल का मौन” केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक ऐसी आत्मिक यात्रा है जो पाठक को उसकी अपनी खामोश यादों और अनकहे जज़्बातों से रूबरू कराती है। यह पुस्तक उन सभी के लिए है जो कविता में अपना प्रतिबिंब खोजते हैं और शब्दों के बीच छिपे एहसासों को महसूस करना चाहते हैं। मुख्य विशेषताएँ: हृदय को स्पर्श करने वाली हिंदी कविताएँ प्रेम, यादें, समाज और देशभक्ति पर आधारित रचनाएँ सरल, प्रभावशाली और अनुभव-समृद्ध भाषा कविता-प्रेमियों और साहित्य-रसिकों के लिए एक आवश्यक संग्रह यह पुस्तक उन लोगों के लिए है जो शोर-भरी दुनिया में भी खामोशी के अर्थ को समझना चाहते हैं।





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